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माँ बेटे की सुंदर कहानी

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*"माँ... माँ कुछ नहीं समझती... हमेशा टोकती रहती है... उसकी वजह से मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो रही है!"* यह शब्द थे आरव के, जो अपने कमरे का दरवाज़ा जोर से पटककर बाहर निकल गया था। उसकी माँ, सुधा, चुपचाप खड़ी रहीं… होंठ कांपते रहे, पर आँखों से कोई आँसू नहीं निकला। शायद अब आँसू भी थक चुके थे। *🌸 एक माँ की शुरुआत* सुधा एक साधारण गाँव की महिला थीं। पति की अचानक मौत के बाद, उन्होंने मजदूरी कर-करके आरव को पढ़ाया। कभी ईंट उठाई, कभी लोगों के बर्तन मांजे, पर बेटे को स्कूल से कभी छुट्टी नहीं लेने दी। जब लोग कहते – *“इतनी पढ़ाई का क्या करेगा तेरा बेटा?”*, सुधा सिर्फ मुस्कुराकर कहती – *“मेरा आरव एक दिन अफसर बनेगा… और मैं गर्व से कहूँगी – ये मेरा बेटा है।”* *📚 स्कूल से कॉलेज तक का सफर* आरव तेज़ था, पढ़ाई में अच्छा। सुधा ने अपना सब कुछ गिरवी रखकर उसे शहर के बड़े कॉलेज में भेजा। आरव जब शहर गया, तो सुधा रोज़ मंदिर जाती, हाथ जोड़ती — *“हे भगवान, मेरे बेटे को कामयाब बना देना, चाहे मुझे रोटी के एक टुकड़े के लिए तरसना पड़े।”* लेकिन शहर जाकर आरव बदलने लगा। अब उसे माँ के कपड़े पुराने लगते, ...

बुरे काम का बुरा नतीजा हिन्दी कहानी

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कहानी कहने और सुनने का काम बहुत पूराने समय से चल रहा है हमारी दादी और नानी हमें बचपन से ही कहानियां सुनाती एक रही हैं।  कभी-कभी तो वह अपने आप ही नई कहानियां जोड़ती जाती हैं और हम सुनते जाते हैं ,आगे क्या होगा ये सोचते जाते हैं उनके पास कहानियों का भंडार होता है।  हम कहानियों को बड़े चाव से सुनते हैं इन कहानियों से हम कई सारी नई चीजें सीखते हैं।  वास्तव में कहानी के द्वारा हम बोलना, समझना, अपनी बात कहना, अनुमान लगाना ,जैसी बहुत सी नई बातें सीखते हैं।    आईये अब एक कहानी 'बुरे काम का बुरा नतीजा 'हम भी पढ़े और जाने ... एक जंगल में बहुत सारे जानवरों आपस में मिलजुल कर रहते हैं उन लोगों आपस में बड़ा प्रेम था एक रामू नाम का हाथी बहुत शैतान था। वह मजाक मजाक में अपनी शैतानियों से सभी लोगों को बहुत परेशान करता था कभी किसी को गिरा देता था तो कभी किसी को सूंड  में उठाकर फेंक देता था।  सभी जानवर से उससे परेशान रहते थे ने एक दिन हाथी ने गोलू भालू के गन्ने का ठेला उलट दिया ,  गन्नो को तोड़ दिया  अपने गन्नो को खरा...