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नाम देव जी का सुन्दर चरित्र

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नामदेव जी का अद्भुत चरित्र संत नामदेव जी, भक्ति आंदोलन के महान संत और कवि, महाराष्ट्र के पंढरपुर में जन्मे थे। उनका जीवन भगवान विट्ठल (विष्णु के अवतार) की भक्ति को समर्पित था। उन्होंने भक्ति के माध्यम से समाज में प्रेम, समानता और सत्य का प्रचार किया। जीवन परिचय नामदेव जी का जन्म 1270 ई. में महाराष्ट्र के नरसी बामनी गांव में हुआ था। उनके पिता दामाशेट और माता गोणाई देवी धार्मिक प्रवृत्ति के थे। बचपन से ही नामदेव जी भगवान विट्ठल के अनन्य भक्त थे। भक्ति और चमत्कार 1. निरंतर भक्ति: नामदेव जी का जीवन भक्ति और भगवान के प्रति अटूट प्रेम का उदाहरण है। कहा जाता है कि वे भगवान विट्ठल को भोजन अर्पित करते थे और भगवान प्रत्यक्ष रूप से भोजन ग्रहण करते थे। 2. चमत्कारी घटनाएं: एक बार मंदिर के पुजारी ने नामदेव की भक्ति को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि भगवान केवल ब्राह्मणों के द्वारा पूजा स्वीकार करते हैं। लेकिन नामदेव जी ने अपनी भक्ति से भगवान को प्रकट किया, जिसने यह सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति जाति और वर्ग से ऊपर है। एक अन्य घटना में जब नामदेव जी को मंदिर से बाहर निकाल दिया गया, तो उ...

हाड़ी रानी की वीर गाथा

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 एक ऐसा बलिदान जिसके बारे में सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाए "हाड़ी रानी की वीर गाथा" राजस्थान के इतिहास की वह घटना जब एक राजपूत रानी विवाह के सिर्फ सात दिन बाद आपने शीश अपने हाथो से काट कर युद्ध में जाने को तैयार अपने को भिजवा दिया ताकि उनका पति नयी नवेली पत्नी की खूबसूरती में उलझ कर अपना कर्तव्य न भूले हाड़ी रानी जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था  यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के रावत रतन सिंह चुण्डावत की रानी थी  जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति रावत चुण्डावत को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह (1653-1681) का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्ध का फरमान मिला  नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर रावत चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नही हो रहा था यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद्ध करने का आग्रह किया  युद्ध में जाते रावत चुण्डावत पत्नी मोह नही त्याग पा रहे थे सो युद्ध में जाते समय उन्...

सबसे कीमती चीज💲

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सबसे कीमती चीज ...आईये कहानी शुरू करते हैं. ..😊😊 सबसे कीमती चीज... एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए... फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए. “अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? ” और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी. ” क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक बार फिर हाथ उठने शुरू हो गए. ” दोस्तों , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था. जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं,...

जब हवा चलती है…तब मैं सोता 😴😴हूं... ko

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जब हवा चलती है….. जब हवा चलती है.. मैं सोता हूँ .... बहुत समय पहले की बात है , आइस्लैंड के उत्तरी छोर पर एक किसान रहता था . उसे अपने खेत में काम करने वालों की बड़ी ज़रुरत रहती थी लेकिन ऐसी खतरनाक जगह , जहाँ आये दिन आंधी –तूफ़ान आते रहते हों , कोई काम करने को तैयार नहीं होता था .... किसान ने एक दिन शहर के अखबार में इश्तहार दिया कि उसे खेत में काम करने वाले एक मजदूर की ज़रुरत है . किसान से मिलने कई लोग आये लेकिन जो भी उस जगह के बारे में सुनता , वो काम करने से मना कर देता . अंततः एक सामान्य कद का पतला -दुबला अधेड़ व्यक्ति किसान के पास पहुंचा . किसान ने उससे पूछा , “ क्या तुम इन परिस्थितयों में काम कर सकते हो ?श्न्व्क्छा क्स्हो मैं सोता हूँ .” व्यक्ति ने उत्तर दिया . किसान को उसका उत्तर थोडा अजीब लगा लेकिन चूँकि उसे कोई और काम करने वाला नहीं मिल रहा था इसलिए उसने व्यक्ति को काम पर रख लिया.  मजदूर मेहनती निकला , वह सुबह से शाम तक ...

स्टीफन हॉकिंग बायोग्राफी हिंदी में

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स्टीफन हॉकिंग जीवन परिचय और 6 महत्वपूर्ण खोजें 👇👇👇 नमस्कार दोस्तों जैसा कि आपने टाइटल में देखा होगा कि आज हम बताएंगे आपको महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के बारे में कि कैसे इन्होंने अपनी शारीरिक समस्याओं के बाबजूद अपनी एक पहचान को बनाया और बहुत से विश्लेषण किए जिससे उन्हें दुनिया को खुद पर गर्व महसूस  करवाया और एक संपूर्ण जीवन जिया और वो मिसाल हैं बहुत से ऐसे लोगो के लिए जो जरा सी प्रॉब्लम आते ही हिम्मत और हौसला दो हार देते हैं आईये जानते हैं उनके बारे में और उनसे कुछ सिखते हैं...🙂🙂 स्टीफन हॉकिंग  का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड में हुआ था। उनके पिता का नाम फ्रैंक और माता का नाम इसोबेल था, उनकी माता स्कॉटिश थी। स्टीफन के पिता एक चिकित्सा संशोधक के रूप में काम करते थे, वही उनकी माता-पिता चिकित्सा अनुसंधान केंद्र में एक सचिव के रूप में सुरक्षित थी। यही मुलाकात हुई और आगे वे शादी कर ली, जिनके कुल चार संतान हुई थी   जिनमें स्टीफन, फिलिपा, मैरी, एडवर्ड ऐसे चार भाई बहन शामिल थे, इसमे एडवर्ड को स्टीफन के माता पिता ने गोद लिया था। शुरू से ही स्टीफन एक मे...

किसान और परमात्मा

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भगवान् पर हिंदी कहानी 👇👇👇 एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया ! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये  एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा ,देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं , लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है ,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा! किसान ने गेहूं की फ़सल बोई ,जब धूप चाही ,तब धूप मिली, जब पानी तब पानी ! तेज धूप, ओले,बाढ़ ,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी ! किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं ,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे. फ़सल काटने का समय भी आया ,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा ,एकद...

राम भक्त | तीन भक्तिपूर्ण प्रेरक प्रसंग

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हनुमान जी की कहानियां  1.)पहला प्रसंग 👇 एक बार माता सीता ने हनुमान जी से प्रसन्न होकर उन्हें हीरों का एक हार दिया, और बाकी सेवकों को भी उन्होंने भेंटस्वरुप मोतियों से जड़े रत्न दिए.. जब हनुमान जी ने हार को अपने हाथ में लिया तब उन्होंने प्रत्येक हीरे को माला से अलग कर दिया और उन्हें चबा-चबाकर जमीन पर फेंकने लगे.. यह देख माता सीता को क्रोध आ गया और वे बोलीं-“ अरे हनुमान! ये आप क्या कर रहे हैं , आपने इतना मूलयवान हार नोंच-खसोटकर नष्ट कर दिया.” यह सुनकर अश्रुपूरित नेत्रों से हनुमान जी बोले- “माते! मैं तो केवल इन रत्नों को खोलकर यह देखना चाहता था कि इनमे मेरे आराध्य प्रभु श्रीराम और माँ सीता बसते हैं अथवा नहीं! आप दोनों के बिना इन पत्थरों का मेरे लिए क्या मोल ? बाकी सेवक यह सारी घटना देख रहे थे, वे तुरंत ही हनुमान जी के पास आकर बोले- कि हनुमान यदि इन निर्जीव वस्तु में श्रीराम नहीं हैं तो श्रीराम कहाँ है? प्रभु श्रीराम तो मेरे ह्रदय में बसते हैं, इतना कहकर उन्होंने अपनी छाती चीर डाली और माता सीता सहित सभी सेवकों को हनुमान जी के ह्रदय में श्रीराम जी के दर्शन हुए......

कहीं आप बन्दर के धंधे में तो नहीं लगेंगे?

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एक समय की बात है , एक गाँव में एक आदमी आया और उसने गाँव वालों से कहा कि वो बन्दर खरीदने आया है ,है और वो एक बन्दर के 10 रुपयेगा. चूँकि  गाँव   में बहुत सारे बन्दर थे इसलिए गाँव वाले तुरंत ही इस काम में लग गए। उस आदमी ने 10 रुपये की दर से 1000  बन्दर खरीदने के लिए अब बंदरों की supply घट गयी है और धीरे-धीरे गाँव वालों ने बन्दर पकड़ने का प्रयास बंद कर दिया। ऐसा होने पर उस आदमी ने फिर ऐलान किया कि अब वो 20 रुपये में एक बन्दर खरीद लेगा। ऐसा  सुनते  ही गांव वाले फिर से बंदरों को पकड़ने  में  लग  गए .... बहुत जल्द बंदरों की संख्या इतने घट  गयी  की लोग ये काम छोड़ अपनी खेती-बारी में लगें। अब एक बन्दर के लिए 25 रुपये दिए जाने पर उनका तादाद इतना कम हो चुकी थी कि पकड़ रहा था तो दूर उन्हें देखने के लिए भी बहुत मेहनत कर रहे थे। तब उस आदमी ने घोषणा की कि वो एक बन्दर के 50 रूपये देगा . पर इस बार उसकी जगह बन्दर खरीदने का काम उसका assistant करेगा क्योंकि उसे किसी ज़रूरी काम से कुछ दिनों के लिए शहर जाना ...

तितली का संघर्ष

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 तितली का संघर्ष story  .... aaj ki kahaani chaliye shuru karte h 😊😊  एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.... इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की  वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे. वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी ...

महात्मा जी की बिल्ली

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एक  बार एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया । महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच्चे को दूध-रोटी खिलाया ।  वह बच्चा वहीं आश्रम में रहकर पलने लगा। लेकिन उसके आने के बाद महात्माजी को एक समस्या उत्पन्न हो गयी कि जब वे सायं ध्यान में बैठते तो वह बच्चा कभी उनकी गोद में चढ़ जाता, कभी कन्धे या सिर पर बैठ जाता । तो महात्माजी ने अपने एक शिष्य को बुलाकर कहा देखो मैं जब सायं ध्यान पर बैठू, उससे पूर्व तुम इस बच्चे को दूर एक पेड़ से बॉध आया करो। अब तो यह नियम हो गया, महात्माजी के ध्यान पर बैठने से पूर्व वह बिल्ली का बच्चा पेड़ से बॉधा जाने लगा । एक दिन महात्माजी की मृत्यु हो गयी तो उनका एक प्रिय काबिल शिष्य उनकी गद्दी पर बैठा । वह भी जब ध्यान पर बैठता तो उससे पूर्व बिल्ली का बच्चा पेड़ पर बॉधा जाता । फिर एक दिन तो अनर्थ हो गया, बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हुयी कि बिल्ली ही खत्म हो गयी। सारे शिष्यों की मीटिंग हुयी, सबने विचार विमर्श किया कि बड़े महात्माजी जब तक बिल्ली पेड़...

साधु की सीख

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किसी गाँव मे एक साधु रहा करता था ,वो जब भी नाचता तो बारिस होती थी . अतः गाव के लोगों को जब भी बारिस की जरूरत होती थी ,तो वे लोग साधु के पास जाते और उनसे अनुरोध करते की वे नाचे , और जब वो नाचने लगता तो बारिस ज़रूर होती कुछ दिनों बाद चार लड़के शहर से गाँव में घूमने आये, जब उन्हें यह बात मालूम हुई की किसी साधू के नाचने से बारिस होती है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ ... शहरी पढाई लिखाई के घमंड में उन्होंने गाँव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिस होगी और अगर हमारे नाचने से नहीं हुई तो उस साधु के नाचने से भी नहीं होगी.फिर क्या था अगले दिन सुबह-सुबह ही गाँव वाले उन लड़कों को लेकर साधु की कुटिया पर पहुंचे. साधु को सारी बात बताई गयी , फिर लड़कों ने नाचना शुरू किया , आधे घंटे बीते और पहला लड़का थक कर बैठ गया पर बादल नहीं दिखे , कुछ देर में दूसरे ने भी यही किया और एक घंटा बीतते-बीतते बाकी दोनों लड़के भी थक कर बैठ गए, पर बारिश नहीं हुई.  अब साधु की बारी थी , उसने नाचना शुरू किया, एक घंटा बीता, बारिश नहीं हुई, साधु नाचता रहा …दो घंटा बीता बारिश नहीं हुई….पर साधु त...

आज ही क्यों नहीं ?

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आज ही क्यों नहीं ?  एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था | अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है |ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है| वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता| यहाँ तक कि अपने पर्यावरण के प्रति भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है | उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली |एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ| जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श ...

गुरु-दक्षिणा

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गुरु दक्षिणा हिंदी कहानी  ...aaiye Kahaani suru karte h 😊 एक बार एक शिष्य ने विनम्रतापूर्वक अपने गुरु जी से पूछा- ‘गुरु जी,कुछ लोग कहते हैं कि  जीवन एक संघर्ष है, कुछ अन्य कहते हैं कि जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं | इनमें कौन सही है?’गुरु जी ने तत्काल बड़े ही धैर्यपूर्वक उत्तर दिया- पुत्र,जिन्हें गुरु नहीं मिला उनके लिए जीवन एक संघर्ष है; जिन्हें गुरु मिल गया उनका जीवन एक खेल है और जो लोग गुरु द्वारा बताये गए मार्ग पर चलने लगते हैं, मात्र वे ही जीवन को एक उत्सव का नाम देने का साहस जुटा पाते हैंयह उत्तर सुनने के बाद भी शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट न था| गुरु जी को इसका आभास हो गया |वे कहने लगे-‘लो, तुम्हें इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ|ध्यान से सुनोगे तो स्वयं ही अपने प्रश्न का उत्तर पा सकोगे | उन्होंने जो कहानी सुनाई,वह इस प्रकार थी👇👇 एक बार की बात है कि किसी गुरुकुल में तीन शिष्यों नें अपना अध्ययन सम्पूर्ण करने पर अपने गुरु जी से यह बताने के लिए विनती की कि उन्हें गुरुदाक्षिणा में, उनसे क्या चाहिए |गुरु जी पहले तो मंद-...