जान बची तो लाखो पाए हिन्दी कहानी
एक गांव में छोटी सी कुटिया में एक वृद्ध महिला रहती थी उसके पास कहानियों का पिटारा तारा था उसका एक पोता था है प्रतिदिन रात में सोने से पहले दादी से कहानी सुनता था दादी भी उसे तरह तरह की मजेदार कहानियां सुनाती थी
वृद्धा की कुटिया छोटी तो थी ही , उसकी छत भी कमजोर थी उसमें कई छोटे छोटे छेद थे .. पोता प्रतिदिन रात को उन छेदो से दूर से आसमान पर चमकते हुए तारे देखता था एक दिन मूसलाधार बारिश हुई... वृद्धा की झोपड़ी की छत से जगह जगह से पानी टपकने लगा -टिप- टिप टिप इस बात से अंजान पोता दादी की गोद में लेटा कहानी सुनने के लिए मचल रहा था वृद्धा खींजकर बोली, "अरे बेटा! कहानी क्या सुनाऊं ? इस टिपटिपा से जान बचे तब ना !दादी के मुंह से टिपटिपा सुनकर पोता उठकर बैठ गया
उसने दादी से पूछा,यह टिपटिपा कौन है ?टिपटिपा क्या शेर ,बाग ,हाथी से बड़ा और ताकतवर होता है ? दादी छत से टपकते हुए पानी की तरफ देख कर बोली , हां बेटा टिपटिपा ना, शेर से डरता है ,ना बाग से कोई किसी से डरे ,ना डरे पर टिपटिपा से जरूर डरे संयोग से मुसीबत का मारा एक बाघ बारिश से बचने के लिए एक झोपड़ी के पीछे बैठा था, बेचारा बाघ बारिश से घबराया हुआ था, वृद्धा की बात सुनकर वह और डर गया उसने सोचा यह टिपटिपा हैं क्या बला है ? जरूर यह कोई बड़ा जानवर है, तभी तो यह वृद्धा शेर ,बाघ,और हाथी से अधिक टिपटिपा से डरती है इससे पहले की बाहर आ कर वह मुझ पर हमला करें मुझे यहां से भाग जाना चाहिए बाघ ने ऐसा सोचा और झटपट वहां से दुम दबा कर भाग गया । उसी गाँव में एक धोबी रहता था सुबह सुबह उसका गधा कहीं भाग गया था। धोबी उसको ढूंढता हुआ पूरे दिन बारिश में भीगता रहा लेकिन गधा कहीं नहीं मिला...तभी धोबी की पत्नी बोली, "जाकर गांव के पंडित जी से क्यों नहीं पूछ लेते ? वह बड़े ज्ञानी हैं आगे -पीछे सबके हाल की उन्हें खबर रहती है वह जरूर बता देंगे की हमारा गधा कहां है पत्नी की बात सुनकर धोबी अपना मोटा सा डंडा उठाकर पंडित जी के घर की तरफ चल पड़ा, उसने देखा कि पंडित जी के घर में बारिश का पानी भरा है, पंडितजी एक बर्तन से पानी को बाहर फेंक रहे हैंं धोबी ने पंडितजी से पूछा की महाराज मेरा गधा सुबह से नहीं मिल रहा है, जरा पोती देखकर बताइए की वह कहां हो सकता है... पंडित जी सुबह से पानी फेंकते फेंकते ठक गए थे कमर तो मनो टूट चुकी थी धोबी की बात तो वह गुस्से से बोले मेरी पोथी में तुम्हारे गढ़े का पता -ठिकाना लिखा है क्या? जो आ गए पूछने जाओ जाकार ढूंढो किसी जंगल या तालाब में ! धोबी वहां से चल दिया चलते चलते वह एक तालाब के पास पहुंचा तालाब के किनारे ऊंची ऊंची घास उग रही थी बेचारा बाघ उसी घास में छुपा बैठा था ..
वह टिपटिपा के डर से के डर से थर -थर कांप रहा था उसके कांपने से घास अपने आप हिल रही थी ...धोबी को लगा कि उसका गधा घास में छिपा बैठा है उसने आव देखा न ताव, बाघ पर मोटा डंडा बरसाने लगा बेचारा बाघ इस अचानक हुए हमले से एकदम डर गया डर के मारे बाघ का गला ही बैठा गया उसकी अकल भी काम नहीं कर रही थी उसने सोचा लगता है यही टिपटिपा है आखिरकार उसने मुझे ढूंढ ही लिया अब अपनी जान बचानी हैं तो यह है जो कहे चुप चाप करते जाओ धोबी ने बिना देखे घास में छिपे हुए बाघ का कान पकड़ा और घसीटता हुआ चल पड़ा चलते चलते वह बड़बड़ाता रहा "आज तूने बहुत परेशान किया है मार मार कर में तेरा कचूमर निकाल दूंगा" बिना चू -चपड़ किए भीगी बिल्ली बना बाघ धोबी के पीछे -पीछे चल दिया घर पहुंच कर धोबी ने बाघ को खूंटे से बांध दिया और सो गया बाघ धोबी के घर बंधकर भी खुश था वह सोच रहा था - के हाथ तो आए पर जान बची तो लाखो पाए ....
आपको ये कहानी केसी लगी प्लीज कमेंट करके जरूर बताएं 🙏🙏


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